NCERT Solutions for Class 8th Hindi Vasant: (Chapter 7) पाठ 7 – क्या निराश हुआ जाए

NCERT Solutions for Class 8th Hindi Vasant: (Chapter 7) पाठ 7 – क्या निराश हुआ जाए हिंदी वसंत भाग- III

– हजारी प्रसाद दिवेदी


पृष्ठ  संख्या: 39

प्रश्न अभ्यास

आपके विचार से

1. लेखक ने स्वीकार किया है कि लोगों ने उन्हें भी धोखा दिया है फिर भी वह निराश नहीं हैं। आपके विचार से इस बात का क्या कारण हो सकता है?

उत्तर

लेखक ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों का वर्णन करते हुए कहा है की उसने धोखा भी खाया है। पर उसका मानना है कि अगर वो इन धोखों को याद रखेगा तो उसके लिए विश्वास करना बेहद कष्टकारी होगा और इसके साथ-साथ ये उन लोगों पर अंगुली उठाएगा जो आज भी ईमानदारी व मनुष्यता के सजीव उदाहरण हैं। यहीं लेखक का आशावादी होना उजागर होता है और उन्हीं लोगों का सम्मान करते हुए उनकी उपेक्षा नहीं करना चाहता जिन्होनें कठिन समय में उसकी मदद की है। इस कारण वो अभी भी निराश नहीं है।

पृष्ठ संख्या: 40

पर्दाफाश

1. दोषों का पर्दाफ़ाश करना कब बुरा रूप ले सकता है?

उत्तर

दोषों का पर्दाफ़ाश करना तब बुरा रूप ले सकता है जब हम किसी के आचरण के गलत पक्ष को उद्घाटित करके उसमें रस लेते है।  हमारा दूसरों के दोषोद्घाटन को अपना कर्त्तव्य मान लेना सही नहीं है। हम यह नहीं समझते कि बुराई समान रूप से हम सबमें विद्यमान है। यह भूलकर हम किसी की बुराई में रस लेना आरम्भ कर देते हैं और अपना मनोरंजन करने लग जाते हैं। हमें करना चाहिए बल्कि उनके अच्छाईओं को भी सरहाना चाहिए।

सार्थक शीर्षक

1. लेखक ने लेख का शीर्षक ‘क्या निराश हुआ जाए’ क्यों रखा होगा? क्या आप इससे भी बेहतर शीर्षक सुझा सकते हैं?

उत्तर

लेखक ने इस लेख का शीर्षक ‘क्या निराश हुआ जाए’ उचित रखा है क्योंकि यह उस सत्य को उजागर करता है जो हम अपने आसपास घटते देखते रहते हैं। अगर हम एक-दो बार धोखा खाने पर यही सोचते रहें कि इस संसार में ईमानदार लोगों की कमी हो गयी है तो यह सही नहीं होगा। आज भी ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने अपनी ईमानदारी को बरकरार रखा है। लेखक ने इसी आधार पर लेख का शीर्षक ‘क्या निराश हुआ जाए’ रखा है। यही कारण है कि लेखक कहता है “ठगा में भी गया हूँ, धोखा मैनें भी खाया है। परन्तु, ऐसी घटनाएँ भी मिल जाती हैं जब लोगों ने अकारण ही सहायता भी की है, जिससे मैं अपने को ढाँढस देता हूँ।”
यदि लेख का शीर्षक ”उजाले की ओर” होता तो शायद लेखक की बात को और बल मिलता।

पृष्ठ संख्या: 41

भाषा की बात

1. दो शब्दों के मिलने से समास बनता है। समास का एक प्रकार है-द्वंद्व समास। इसमें दोनों शब्द प्रधान होते हैं।जब दोनों भाग प्रधान होंगे तो एक-दूसरे में द्वंद्व (स्पर्धा, होड़) की संभावना होती है। कोई किसी से पीछे रहना नहीं चाहता, जैसे – चरम और परम = चरम-परम, भीरु और बेबस = भीरू-बेबस। दिन और रात = दिन-रात।
‘और’ के साथ आए शब्दों के जोड़े को ‘और’ हटाकर (-) योजक चिह्न भी लगाया जाता है। कभी-कभी एक साथ भी लिखा जाता है। द्वंद्व समास के बारह उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।

उत्तर

1सुख और दुखसुख-दुख
2भूख और प्यासभूख-प्यास
3हँसना और रोनाहँसना-रोना
4आते और जातेआते-जाते
5राजा और रानीराजा-रानी
6चाचा और चाचीचाचा-चाची
7सच्चा और झूठासच्चा-झूठा
8पाना और खोनापाना-खोना
9पाप और पुण्यपाप-पुण्य
10स्त्री और पुरूषस्त्री-पुरूष
11राम और सीताराम-सीता
12आना और जानाआना-जाना

2. पाठ से तीनों प्रकार की संज्ञाओं के उदाहरण खोजकर लिखिए।

उत्तर

व्यक्तिवाचक संज्ञा: रबींद्रनाथ टैगोर, मदनमोहन मालवीय, तिलक, महात्मा गाँधी आदि।
जातिवाचक संज्ञा: बस, यात्री, मनुष्य, ड्राइवर, कंडक्टर, हिन्दू, मुस्लिम, आर्य, द्रविड़, पति, पत्नि आदि।
भाववाचक संज्ञा: ईमानदारी, सच्चाई, झूठ, चोर, डकैत आदि।

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